Sunday, July 23, 2017

विश्व जनसंख्या दिवस कब से मनाया जा रहा है?

विश्व जनसंख्या दिवस हर साल 11 जुलाई को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य जनसंख्या सम्बंधित समस्याओं पर वैश्विक चेतना जगाना है. यह 1987 से मनाया जा रहा है। 11 जुलाई, 1987 को विश्व की जनसंख्या 5 अरब को पार कर गई थी. तब संयुक्त राष्ट्र ने जनसंख्या वृद्धि को लेकर दुनिया भर में जागरूकता फैलाने का निश्चय किया. अलबत्ता पहला विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई 1990 को 90 देशों में मनाया गया. इसके बाद दिसंबर 1990 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव 45/216  पास करके हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का फैसला किया. तब से इस विशेष दिन को हर साल परिवार कल्याण का संकल्प लेने के दिन के रूप में याद किया जाने लगा. विश्व की जनसंख्या और दुनिया के 20 देशों की जनसंख्या की नवीनतम स्थिति जानने के लिए आप इस वैबसाइट पर जाकर वर्ल्ड पॉपुलेशन मीटर देख सकते हैं http://www.worldometers.info/world-population/

ओलिंपिक खेलों में भाग लेने के लिए क्या कोई आयु सीमा भी है?

ओलिंपिक चार्टर के अनुसार कोई आयु सीमा नहीं है. अलबत्ता अलग-अलग खेल संघों ने अपनी तरफ से आयु सीमाएं तय कर रखी हैं. मसलन जिम्नास्टिक्स में 16 साल के कम आयु के प्रतियोगी भाग नहीं ले सकते. सन 2016 के रियो ओलिंपिक में नेपाल की तैराक गौरिका सिंह ने 13 वर्ष की आयु में ओलिंपिक प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लिया. वे रियो में सबसे कम उम्र की खिलाड़ी थीं. ओलिंपिक खेलों के इतिहास में सबसे उम्रदराज प्रतिस्पर्धी थे स्वीडन के ऑस्कर स्वॉन, जिन्होंने 1920 की शूटिंग प्रतियोगिता में भाग लिया. उस वक्त उनकी उम्र थी 72 साल 281 दिन. रियो ओलिंपिक में उज्बेकिस्तान जिम्नास्ट ओक्साना चुसोवितीना सबसे बुजुर्ग खिलाड़ी थीं. उनकी उम्र थी 41 वर्ष. वे सन 1992 के ओलिंपिक से लगातार भाग ले रहीं थीं.

हम अक्सर कहते हैं हाथ या पैर सो गया. यह क्या होता है?

इसे अंग्रेजी में Paresthesia कहते हैं, जिसके लिए हिंदी में शब्द हैं संवेदनशून्यता या अकड़ना. इसमें थोड़ी देर के लिए हाथ-पैर या शरीर का कोई दूसरा अंग निर्जीव हो जाता है या झनझनाहट होने लगती है. इसकी वजह है शरीर की किसी नाड़ी का दब जाना. जिस तरह शरीर में रक्त संचार के लिए धमनियाँ हैं, उसी तरह शरीर के अंगों का मस्तिष्क से संपर्क नाड़ी तंत्र के माध्यम से होता है. जब शरीर के किसी हिस्से पर लंबे अर्से तक दबाव पड़ता है तो धमनियों और नाड़ियों दोनों के काम प्रभावित होते हैं. जैसे ही दबाव हटता है सारी गतिविधियाँ फिर से शुरू हो जाती हैं.  

दो शहरों को जोड़ने वाली सड़कों को हाइवे क्यों कहते हैं?

हाइवे शब्द प्राचीन रोमन साम्राज्य की देन है. रोमन बादशाहों ने देश के 200 शहरों को सड़कों से जोड़ा था. ऐसी सड़कें पक्की होती थीं और इतनी अच्छी बनाई जाती थीं कि उनपर से होकर सेना के घुड़सवार दस्ते और रथ वगैरह आसानी से गुजर सकें. इन्हें जमीन की सामान्य सतह से कुछ ऊँचा बनाया जाता था ताकि दूर से दिखाई पड़ें और यदि कोई शत्रु हमला करना चाहता है तो वह दिखाई पड़े. बारिश के बाद इनमें पानी भी नहीं भरता था. इनकी ऊँचाई की वजह से इन्हें हाइवे कहा गया. बाद में सारी दुनिया में शहरों को जोड़ने वाली सड़कों को हाइवे कहा जाने लगा.

ग्रेट विक्टोरिया रेगिस्तान कहाँ है?

द ग्रेट विक्टोरिया रेगिस्तान ऑस्ट्रेलियन रेगिस्तानों में से एक है. इस रेगिस्तान का क्षेत्रफल 338,000 वर्ग किमी है. इस रेगिस्तान की यह विशेषता है कि यहाँ वनस्पति बहुतायत से होती है. ब्रिटेन ने 1952 में जब एटम बम बनाया तो उसका परीक्षण यहाँ आकर किया.
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

Sunday, July 16, 2017

विजिलांट कौन होते हैं?

अंग्रेजी में यह शब्द फ्रेंच शब्द vigilant से या सीधे लैटिन शब्द vigilantem  से आया है. इनका अर्थ है निगरानी, चौकसी वगैरह. हिस्पानी भाषा में vigilante का मतलब चौकीदार है. उन्नीसवीं सदी में अमेरिका में नागरिकों की सुरक्षा समितियों को विजिलांट कमेटी कहा जाता था.

यह शब्द हाल में गोरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा के संदर्भ में इस्तेमाल हो रहा है. ऐसी मान्यता है कि सजग नागरिकों और सजग राजनेताओं के रहते लोकतंत्र में कोई ताकत जन-हित की उपेक्षा नहीं कर सकती. और यह भी कि सजग नागरिक फिर किसी भी हद तक जाकर हस्तक्षेप कर सकते हैं, भले ही वे इसके लिए अधिकृत नहीं हों.

इस प्रवृत्ति को समर्थक कहते हैं कि जब समाज में न्याय व्यवस्था बची नहीं रहती या बेहद सुस्त होती है तब नागरिक सीधे हस्तक्षेप करते हैं. इसे भीड़ का न्याय भी कह सकते हैं. यह प्रवृत्ति राज-व्यवस्था के जन्म के पहले से चली आ रही है. मध्य युग में एशिया, अफ्रीका और यूरोप में ऐसे तमाम मिलते हैं जब भीड़ ने किसी को चोर या अपराधी बताकर मार डाला. लोक कथाओं में रॉबिनहुड और सुलताना डाकू की कहानियाँ प्रसिद्ध हैं, जो जनता के हित में कार्रवाई करते थे.

ऑडिटोरियम में ग्रीन रूम को ग्रीन रूम क्यों कहते हैं?

कहा जाता है कि सन 1599 में लंदन के ब्लैकफ्रायर्स थिएटर में मंच के ठीक पीछे उन कलाकारों के बैठने की व्यवस्था की गई, जिन्हें बाद में मंच पर जाना था. इस कमरे में हरे रंग की पुताई की गई थी. धीरे-धीरे सका नाम ग्रीन रूम हो गया. एक बात यह भी कही जाती है कि मंच की रोशनी से कलाकारों की आँखें चौंधिया जाती थीं. उन्हें कुछ आराम देने के लिए ऐसे कमरे को हरे रंग से पोतते थे.

मैकमोहन लाइन क्या होती है?-

यह भारत और तिब्बत के बीच सीमा रेखा है. सन् 1914 में भारत की तत्कालीन ब्रिटिश सरकार और तिब्बत के बीच शिमला समझौते के तहत यह रेखा तय की गई थी. 1914 के बाद कई साल तक इस रेखा को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ, पर 1937 में ओलफ केरो नामक एक अंग्रेज प्रशासनिक अधिकारी ने तत्कालीन अंग्रेज सरकार को इसे आधिकारिक तौर पर लागू करने का अनुरोध किया. 1937 में सर्वे ऑफ इंडिया के एक मानचित्र में मैकमहोन रेखा को आधिकारिक भारतीय सीमारेखा के रूप में पर दिखाया गया था. इस सीमारेखा का नाम सर हैनरी मैकमाहोन (Henry McMahon) के नाम पर रखा गया था, जिनकी इस समझौते में महत्त्वपूर्ण भूमिका थी. वे भारत की तत्कालीन सरकार के विदेश सचिव थे. इसे मैकमाहोन रेखा कहना चाहिए, पर प्रचलन में मैकमोहन रेखा है.

क्या चींटियाँ सोती नहीं हैं?

ऐसा माना जाता था कि चीटियाँ सोती नहीं. पर वैज्ञानिक रिसर्च से पता लगा है कि उनके सोने का ढंग अलग है. जुलाई 2009 में द जरनल ऑफ इनसेक्ट बिहेवियर में में Deby L. Cassill, Skye Brown, Devon Swick and George Yanev के शोधपत्र में बताया गया कि चींटियों की एक प्रजाति फायर एंट जरीर सोती है. इनमें श्रमिक चीटियाँ 24 घंटे में करीब साढ़े चार घंटे और रानी चीटियाँ करीब साढ़े नौ घंटे सोती हैं. आमतौर पर चीटियाँ काम करते-करते एक से डेढ़ मिनट की झपकी लेती हैं. इस तरह वे चौबीस घंटे में दो सवा दो सौ बार सोती हैं. आप उन्हें गौर से देखें तो वे एक जगह थोड़ी देर के लिए ठहर जाती हैं. यही उनकी झपकी या नैप है.

क्षेत्रफल में सबसे बड़ा देश

श्रेणी में रूस सबसे बड़ा देश है. रूस का कुल क्षेत्र 1 करोड़ 70 लाख 98 हजार 242 वर्ग किलोमीटर है. दूसरे स्थान पर कनाडा है जिसका क्षेत्रफल 99 लाख, 46 हजार 670 वर्ग किलोमीटर है. पहले सात देशों की सूची इस प्रकार है: 1.रूस  1,70,98,242, 2.कनाडा 99,84,670, 3.संरा अमेरिका 96, 29, 091, 4.चीन 95,96,961, 5.ब्राजील 85,14,877, 6.ऑस्ट्रेलिया 76,92,024, 7.भारत 32,87,263.
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

Thursday, July 6, 2017

हैक्टिविज़्म किसे कहते हैं?

हैक्टिविज़्म इंटरनेट से आया शब्द है, जो अंग्रेजी के एक्टिविज्म और हैकिंग के संयोग से बनाया गया है. किसी विचारधारा के प्रसार के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल हैक्टिविज़्म कहलाता है और इस काम को करने वाले हैक्टिविस्ट कहलाते हैं. यह शब्द सन 1994 में पहली बार कंप्यूटर हैकर ग्रुप कल्ट ऑफ द डैड काउ (सीडीसी) के सदस्य ओमेगा ने गढ़ा था. हैक्टिविज़्म शब्द का इस्तेमाल सायबर आतंकवाद के लिए भी इस्तेमाल होने लगा है. दूसरी ओर विकीलीक्स जैसे समूहों के लिए भी इस शब्द का इस्तेमाल चल रहा है. पश्चिमी देशों में इसे पूँजीवाद विरोधी विचारधारा का प्रमुख वाहक भी माना जा रहा है.
किंग आर्थर कौन थे?
किंग आर्थर एक ब्रिटिश महानायक का नाम है, जिनके बारे में कई तरह की किंवदंतियाँ हैं. कहा जाता है कि उन्होंने मध्ययुगीन इतिहास और कल्पित-कथा के अनुसार छठी शताब्दी के प्रारम्भ में सैक्सन हमलावरों के खिलाफ ब्रिटेन की सेना का नेतृत्व किया था. आर्थर का चरित्र मूलतः लोककथाओं और साहित्यिक रचनाओं में गढ़ा गया है. उनके ऐतिहासिक अस्तित्व को लेकर इतिहासकारों में विवाद और मतभेद हैं. यह नाम प्राचीन काव्यों में पहली बार आया था. बारहवीं सदी के ब्रिटिश धर्मगुरु ज्यॉफ्री मॉनमाउथ ने द हिस्ट्री ऑफ किंग्स ऑफ ब्रिटेन में उनका जिक्र किया है. लोककथाओं में उसके पहले भी ऐसे जादुई चरित्र का वर्णन मिलता है. ज्यॉफ्री ने वर्णन किया है कि आर्थर ब्रिटेन के राजा थे जिन्होंने सैक्संस को हराया था और ब्रिटेन, आयरलैंड, आइलैंड, नॉर्वे और गॉल में एक साम्राज्य की स्थापना की थी. उन्नीसवीं सदी में इस पात्र को जीवन मिला. बीसवीं सदी में थिएटर फिल्म, टीवी, कॉमिक्स और दूसरे मीडिया में किंग आर्थर के किस्से खूब चलने लगे.  
भारत का पहला विश्वविद्यालय?
प्राचीन भारत के तक्षशिला और नालन्दा विश्वविद्यालय दुनिया के प्राचीनतम विश्वविद्यालय हैं.  पर आधुनिक विश्वविद्यालयों के अर्थ में भारत का पहला विश्वविद्यालय कोलकाता में खुला. इसकी स्थापना 24 जनवरी 1857 को हुई. उसी साल मद्रास और मुम्बई की प्रेसीडेंसियों में भी विश्वविद्यालय खुले थे. कोलकाता विश्वविद्यालय से जुड़े चार विद्वानों को नोबेल पुरस्कार मिल चुके हैं. इनके नाम हैं-रोनाल्ड रॉस, रवीन्द्र नाथ ठाकुर, सीवी रामन और अमर्त्य सेन.
ड्रैगन वास्तविक होता है या काल्पनिक?
ड्रैगन काल्पनिक प्राणी है. ज्यादातर सभी प्राचीन सभ्यताओं में ड्रैगन जैसे विशाल सर्प, अजगर या डायनोसॉर जैसे प्राणी की परिकल्पना मिलती है. ड्रैगन शब्द लैटिन के ड्रैको से बना है. साँप, अजगर जैसे चकत्तेदार खाल वाले, मगरमच्छ और घोड़े जैसे मुख और छिपकली जैसे पैर वाले प्राणी की परिकल्पना यूरोप के अलावा चीनी, जापानी, फारसी और संस्कृत साहित्य में भी मिलती है. यूरोप के ड्रैगन के शरीर में चमगादड़ जैसे डैने भी होते हैं. इधर डायनोसॉर जैसे शरीर वाले ड्रैगनों की तस्वीरों और खिलौनों की बाढ़ आई है. कुछ वास्तविकताओं और कुछ कल्पनाशीलता से बना ड्रैगन सम्भवतः: दुनिया का सबसे लोकप्रिय पात्र है.
माचिस कब बनी?
माचिस शब्द अंग्रेजी के मैच से आया है. इसका अर्थ है बत्ती या लैम्प की नोक. यूरोप में औद्योगिक क्रांति के दौरान सेल्फ इग्नाइटेड मैच की ईजाद हुई. पेरिस के प्रोफेसर के चैंसेल ने पोटेशियम क्लोरेट, गंधक, चीनी और रबर के घोल को लकड़ी में लपेटकर रोशन तीली 1805 में बनाई. उधर इंग्लैंड के केमिस्ट जॉन वॉकर ने 1826 ने पहली फ्रिक्शन मैच बनाई. इसमें एंटीमनी सल्फाइड, पोटेशियम क्लोरेट, गोंद और स्टार्च को लकड़ी पर लपेटा गया. सूखने के बाद इसे किसी खुरदुरी सतह पर रगड़ा गया तो आग पैदा हुई. सैमुअल जोन्स नाम के किन्हीं सज्जन ने इसे पेटेंट करा लिया. इसका नाम था ल्युसिफर मैच. नीदरलैंड्स में आज भी माचिस को ल्युसिफर कहते हैं.   
http://epaper.prabhatkhabar.com/1270447/Awsar/Awsar#page/6/1