भारत को इंडिया क्यों कहा जाता है?
चेतन, वाया ईमेल
प्राचीन ग्रीक और लैटिन में भारत को सिंधु नदी के पास इलाके से पहचाना जाता था। सिंधु को वे स का लोप करके इंडस बोलते थे। इसी सिंधु से फारसी अरबी में हिन्दू और हिन्द शब्द बने। चीनी भाषा में इसे इन्दु लिखते हैं।
अंग्रेज लोग अपने नाम के आगे लॉर्ड क्यों लगाते थे? जैसे-लॉर्ड डलहौजी, लॉर्ड इरविन। क्या वे खुद को भगवान समझते थे ?
शशांक मेहता mr.shashankmehta@gmail.com लॉर्ड सामंती युग का शब्द है, जिसका अर्थ स्वामी, प्रभु और मालिक है। हम ईश्वर को भी इस अर्थ में सम्बोधित करते हैं। इंग्लैंड में यह सम्मान का शब्द भी है जैसे लॉर्ड मेयर और लॉर्ड जस्टिस। वहाँ हाउस ऑफ लॉर्ड्स पुराने तालुकेदारों की संस्था है। लॉर्ड डलहौजी वगैरह वैसे ही सामंती नाम थे। पर अब लॉर्ड सम्मानसूचक है और उनका मनोनयन होता है। इंग्लैंड की संसद के उच्च सदन हाउस ऑफ लॉर्ड्स में अब 92 ऐसे सदस्य हैं जिनका सम्बन्ध जमीन्दारी या राजशाही से है। वह परम्परा खत्म हो गई। इस सदन के सुधार का काम चल रहा है और अब एक प्रस्ताव है कि सदन में कुल 450 सदस्य हों, इनमें से 12 लॉर्ड स्पिरिचुअल यानी चर्च ऑफ इंग्लैंड के प्रतिनिधि हों। शेष किसी न किसी रूप में चुने हुए हों।
महात्मा गांधी को क्या कभी आधिकारिक तौर पर राष्ट्रपिता की उपाधि दी गई थी?
जितेन्द्र बामणियां, बाड़मेर महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता की कोई औपचारिक उपाधि नहीं दी गई। यह भी कहना मुश्किल है कि सबसे पहले उन्हें राष्ट्रपिता किसने कहा। हाल में लखनऊ की 10 साल की बच्ची ऐश्वर्या ने सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी मांगी थी, पर इसका जवाब सरकार के पास नहीं है। ऐश्वर्या ने प्रधानमंत्री कार्यालय को चिठ्ठी भेजकर यह सवाल किया था। प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह चिठ्ठी गृह मंत्रालय के पास भेजी। बहरहाल ऐश्वर्या के पास जवाब आया, ऐसी कोई जानकारी दर्ज नहीं। गांधी को पहली बार सम्भवतः 1914 में रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने महात्मा कहा था। उन्हें गुजरात में बापू कहते हैं। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने 1944 में रंगून के एक भाषण में उन्हें राष्ट्रपिता कहा था। गांधी जी की हत्या के बाद देश के नाम अपने सम्बोधन में जवाहरलाल नेहरू ने कहा, 'हमारे जीवन से रोशनी चली गई और चारों तरफ़ अंधकार छा गया है। मैं नहीं जानता कि मैं आपको क्या बताऊँ और कैसे बताऊँ। हमारे प्यारे नेता, राष्ट्रपिता बापू अब नहीं रहे।'

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ReplyDeletenamaskar joshi ! baut hi sarthak prayas
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