Saturday, November 12, 2011

सबसे सस्ता पेट्रोल कहाँ मिलता है?

सबसे सस्ता पेट्रोल किन देशों में मिलता है?-संजय 

किसी पर्यटक ने यह तस्वीर खींची है जिसमें 2.53 बोलीवार में 26.13 लिटर पेट्रोल की कीमत नज़र आती है। 2.53 बोलीवार यूरो के बीस सेंट यानी भारत के करीब 18 रु। 

मेरी जानकारी में सबसे सस्ता पेट्रोल वेनेज़ुएला में मिलता है जहाँ इसकी कीमत एक रुपया प्रति लिटर से भी कम है।  है। यह राशि मोटा अनुमान है क्योंकि मुद्रा-मूल्य के आधार पर एकदम सही अनुमान लगाना कठिन होता है। बहरहाल यह कीमत 1998 से चल रही है। वेनेज़ुएला तेल निर्यातक देश है और अपने नागरिकों को इसपर सब्सिडी देता है। सउदी अरब में यह 7 रु, तुर्कमेनिस्तान में 12 रु, यूएई में 24 रु और अमेरिका में करीब 50 रु यानी के डॉलर के आसपास है। यूरोप में यह महंगा है इंग्लैंड में इसकी कीमत तकरीबन 110 रु प्रति लिटर है और जापान में तकरीबन 90 रु। जहाँ महंगा है वहाँ इसकी कीमत टैक्स के कारण है।

एफ1 रेसिंग की शुरुआत कैसे और कब हुई?-मनजीत सिह 



इसे फॉर्मूला वन विश्व प्रतियोगिता कहते हैं। यह एक सीट की ऑटो रेस है, जिसे विश्व ऑटोमोबाइल संघ की स्वीकृति प्राप्त है। फॉर्मूला-1 कहने की वजह नियमों का वह सैट है जिसे यह नाम दिया गया है। वैसे तो इस प्रकार की कार रेस 1920 और 30 के दशक में भी होती थीं। दूसरे विश्वयुद्ध के पहले इन नियमों के तहत एक विश्व प्रतियोगिता शुरू कराने की बात चली थी। पर युद्ध के कारण बात रुक गई। विश्व युद्ध खत्म होने के बाद 1946 में पहली गैर-चैम्पियनशिप रेस हुई। पहली विश्व चैम्पियनशिप रेस 1950 में ब्रिटेन के सिल्वरस्टोन में हुई। 

शास्त्रीय नृत्य सीखने के लिए लिए दिल्ली में सबसे अच्छा इंस्टीट्यूट कौन सा है?-मीना
पहले आपको तय करना है कि किस पद्धति के डांस में आपकी दिलचस्पी है। दिल्ली में अनेक अच्छे विद्यालय हैं। मैं कुछ के नाम बताता हूँ। श्रीराम भारतीय कला केन्द्र, कथक केन्द्र, सोनल मान सिंह का सेंटर फॉर इंडियन क्लैसिकल डांस, सरोजा वैद्यनाथन का गणेश नाट्यालय, मैरी इलंगोवन का परम्परा, गंधर्व महाविद्यालय, यामिनी कृष्णमूर्ति का स्कूल ऑफ डांस, लीला सैमसन का स्पंद, गीता चन्द्रन का नाट्यवृक्ष, कुचिपुडी डांस एकेडमी, मणिपुरी फाइन आर्ट्स सेंटर वगैरह।

इस देश की आबादी तेजी से बढ़ रही है। इसी तरह से बढ़ती रही तो हम कहाँ रहेंगे, क्या खाएंगे?-एमएल गांधी
आबादी इसी गति से नहीं बढ़ेगी। एक समय आएगा, जब इसकी वृद्धि थम जाएगी। जब एक माँ और एक पिता की दो संतानें होंगी तो वृद्धि दर अपने आप रुक जाएगी। आबादी बढ़ने का एक कारण अज्ञान है। शिक्षा-प्रसार के साथ-साथ यह अज्ञान खत्म हो जाएगा।

क्या भविष्य में उड़ने वाली कुर्सियाँ बनेगी, जिनमें बैठकर हम एक जगह से दूसरी जगह पर जा सकेंगे?-शकेन 





ऐसा आज भी सम्भव है। जापानी इंजीनियरों ने हूवरक्राफ्ट की शैली में कुर्सी बनाई है जो हवा के कुशन पर चलती है। यानी यह ज़मीन पर चल सकती है और पानी की सतह पर भी।  साथ ही यह सिंगल सीट हेलीकॉप्टर तकरीबन हवाई कुर्सी जैसा ही है। भविष्य में इससे बेहतर तरीके ईज़ाद होंगे। 

हमारी धरती किस चीज़ पर रुकी हुई है?-अमित
किसी चीज़ पर रुकी नहीं है। अपनी गुरुत्व शक्ति के सहारे अंतरिक्ष में लगातार घूम रही है और एक यात्रापथ पर चल रही है।

एक ओंकार सतनाम-इस मंत्र का क्या अर्थ है?
ओंकार शब्द ब्रह्म, ईश्वर, अल्लाह या गॉड का वाचक शब्द है। इस मंत्र का अर्थ है सृष्टि का रचेता एक ईश्वर। यह नाम ही सत्य है। One Universal Creator God. The Name Is Truth. गुरु नानक देव की शिक्षा का यह मूल मंत्र है।

हम सिर ऊपर करके धरती से चन्द्रमा को देखते हैं। चन्द्रमा से धरती क्या नीचे दीखेगी?-मोहन
मोहन जी आपकी मजबूरी है कि आप आसमान में ही कुछ देख सकते हैं। जिसे आप धरती के नीचे मानते हैं, वहाँ कुछ हो भी तो क्या आप देख पाएंगे। ऐसा ही चन्द्रमा पर होगा। दरअसल ऊपर नीचे कुछ नहीं है। सबकुछ गतिमान है। जब जो चीज़ घूमकर हमारे सामने के आसमान पर आ जाती है तभी आप उसे देख पाते हैं।

वीज़ा का पूरा नाम क्या क्या है?-आरुषि चिदम्बरम
Visa International Service Association (Visa)

आँवला खाने से क्या फायदा है? एक दिन में कितने कच्चे आँवले खा सकते हैं? 


आँवला विटामिन 'सी' का सर्वोत्तम और प्राकृतिक स्रोत है। इसमें विद्यमान विटामिन 'सी' नष्ट नहीं होता। आँवला पाण्डु, रक्तपित्त, अरुचि, त्रिदोष, दमा, खाँसी, श्वास रोग, कब्ज, क्षय, छाती के रोग, हृदय रोग आदि अनेक रोगों को नष्ट करने की शक्ति रखता है। चर्बी घटाकर मोटापा दूर करता है। सिर के बालों को काले, लम्बे व घने रखता है। विटामिन सी ऐसा नाजुक तत्व होता है जो गर्मी के प्रभाव से नष्ट हो जाता है, लेकिन आँवले में विद्यमान विटामिन सी कभी नष्ट नहीं होता। एक या दो आँवले रोज खाना काफी है।

12/12/12 को दुनिया खत्म होगी? कैलेंडर में उसके आगे की तारीख न दीखना क्या है?-कुलवंत कौर 
पहले यह देखें कि यह क्यों मान लिया गया कि 21 दिसम्बर 2012 को दुनिया खत्म हो जाएगी। मध्य अमेरिका में यूरोपीय लोगों के आने के पहले मेसोअमेरिकन लांग काउंट कैलेंडर प्रचलित था। इस कैलेंडर में 7200 दिन का एक एक कातुन और 1 लाख 44 हजार दिन का एक बक्तुन होता है। प्राचीन माया सभ्यता के अवशेषों में ऐसा कैलेंडर पत्थरों में खुदा मिलता है। इन शिला लेखों में केवल 13वें बक्तुन तक की तारीखें दर्ज हैं। 13वाँ बक्तुन 21 दिसम्बर 2012 को खत्म होगा। इसलिए यह धारणा पैदा कर ली गई कि उसके बाद दुनिया नहीं रहेगी। मेरे विचार से यह सब बात गलत है। इसे इस तरीके से क्यों न देखें कि इस कैलेंडर में चौदहवां बक्तुन और एक बेहतर दौर शुरू होगा। 

एफएम गोल्ड के कार्यक्रम बारिश सवालों की में शामिल

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