Friday, January 13, 2017

संसद के कितने सत्र होते हैं?

सामान्यतः हर साल संसद के तीन सत्र होते हैं. बजट (फरवरी-मई), मॉनसून (जुलाई-अगस्त) और शीतकालीन (नवंबर-दिसंबर).  बजट अधिवेशन को दो हिस्सों में विभाजित कर दिया जाता है. इन दोनों के बीच तीन से चार सप्ताह का अवकाश होता है. इस दौरान स्थायी समितियाँ विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान माँगों पर विचार करती हैं. इस साल से बजट सत्र जनवरी के अंतिम सप्ताह से शुरू करने का फैसला किया गया है.
राष्ट्रपति दोनों सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करते हैं. हरेक अधिवेशन की अंतिम तिथि के बाद छह मास के भीतर आगामी अधिवेशन के लिए सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करना होता है. सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करने की शक्ति राष्ट्रपति में निहित है, पर व्यवहार में इस आशय के प्रस्‍ताव की पहल सरकार द्वारा की जाती है. इन तीन के अलावा संसद के विशेष सत्र भी बुलाए जा सकते हैं.
राष्ट्रपति का अभिभाषण
बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से होती है जो संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में दोनों सदनों के समक्ष होता है. अभिभाषण में ऐसी नीतियों एवं कार्यक्रमों का विवरण होता है जिन्हें आगामी वर्ष में कार्य रूप देने का विचार हो. साथ ही, पहले वर्ष की उसकी गतिविधियों और सफलताओं की समीक्षा भी की जाती है. अभिभाषण चूंकि सरकार की नीति का विवरण होता है अंत: सरकार द्वारा तैयार किया जाता है. अभिभाषण पर चर्चा होती है और सदन राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पास करता है.
श्वेत-पत्र किसे कहते हैं?
श्वेत-पत्र का मतलब होता है ऐसा दस्तावेज जिसमें सम्बदध विषय से जुड़ी व्यापक जानकारी दी जाती है. इस शब्द की शुरुआत ब्रिटेन से हुई है. सन 1922 में ‘चर्चिल ह्वाइट पेपर’ सम्भवतः पहला श्वेत पत्र था. यह दस्तावेज इस बात की सफाई देने के लिए था कि ब्रिटिश सरकार यहूदियों के लिए फलस्तीन में एक नया देश इसरायल बनाने के लिए 1917 की बालफोर घोषणा को किस तरह अमली जामा पहनाने जा रही है. कनाडा तथा दूसरे अन्य देशों में भी ऐसी परम्परा है. सन 1947 में जब कश्मीर पर पाकिस्तानी हमला हुआ था उसके बाद 1948 में भारत सरकार ने श्वेत-पत्र जारी करके अपनी तरफ से पूरी स्थिति को स्पष्ट किया था. मई 2012 में भारत सरकार ने काले धन पर और सन 2015 में रेलवे को लेकर श्वेत पत्र जारी किया. दूसरे विषयों पर भी श्वेत पत्र जारी हुए हैं.
सिल्क रोड क्या है?
सिल्क रोड या रेशम मार्ग प्राचीन और मध्यकाल में ऐतिहासिक व्यापारिक-सांस्कृतिक मार्गों का एक समूह था जिसके माध्यम से एशिया, यूरोप और अफ्रीका जुड़े हुए थे. इन मार्गों में सबसे ज्यादा प्रचलित हिस्सा उत्तरी रेशम मार्ग था जो चीन से होकर पश्चिम की ओर पहले मध्य एशिया में और फिर यूरोप तक जाता था. इसकी एक शाखा भारत की ओर आती थी. तकरीबन साढ़े छह हजार किलोमीटर लंबे इस रास्ते का नाम चीन के रेशम के नाम पर पड़ा जिसका व्यापार इस मार्ग की मुख्य विशेषता थी. इसके मार्फत मध्य एशिया, यूरोप, भारत और ईरान में चीन के हान राजवंश काल में पहुँचना शुरू हुआ.
सिल्क रोड के माध्यम से व्यापार के अलावा, ज्ञान, धर्म, संस्कृति, भाषाओं, विचारधाराओं, भिक्षुओं, तीर्थयात्रियों, सैनिकों, यायावरों और बीमारियों का प्रसार भी हुआ. एक तरह से यह वैश्वीकरण का रास्ता भी था.  हाल में चीन ने सिल्क रोड की तर्ज पर एक नई परियोजना शुरू की है. इसका नाम  है ‘वन बेल्ट वन रोड’ (ओबीओआर). यह प्राचीन सिल्क रोड का 21वीं सदी का संस्करण है. ओबीओआर का मक़सद है व्यापार के लिए समुद्री और ज़मीनी, दोनों तरह के रास्तों का विकास करना ताकि चीन को बाहरी दुनिया से जोड़ा जा सके.
क्या मुम्बई शहर दहेज में मिला था?
मुम्बई या बॉम्बे का माहिम वाला इलाका तकरीबन एक हजार साल पहले बस गया था. 1348 में मुस्लिम सेनाओं ने इस द्वीप को जीत लिया और यह गुजरात राज्य का हिस्सा बन गया. इसके बाद पुर्तगालियों ने सन 1507 में इस इलाके को जीतने की कोशिश की, पर वह सफल नहीं हुई. लेकिन 1534 में गुजरात के शासक सुल्तान बहादुरशाह ने यह द्वीप पुर्तग़ालियों को एक समझौते के तहत सौंप दिया. 1661 में इंग्लैंड के किंग चार्ल्स द्वितीय व पुर्तग़ाल के राजा की बहन कैथरीन आफ़ ब्रैगेंज़ा के विवाह के बाद पुर्तगालियों ने यह तोहफे के तौर पर 1668 में ईस्ट इंडिया कम्पनी को सौंप दिया.
वे दो दिन जब दिन-रात बराबर होते हैं
हिंदी में इसे विषुव और अंग्रेज़ी में इक्विनॉक्स कहते हैं. यानी ऐसा समय-बिंदु, जिसमें दिन और रात बराबर हों. किसी इलाके में दिन और रात की लंबाई पर असर डालने वाली कई बातें होतीं हैं. धरती अपनी धुरी पर 23½° झुककर सूर्य के चक्कर लगाती है, इस प्रकार वर्ष में एक बार पृथ्वी इस स्थिति में होती है, जब वह सूर्य की ओर झुकी रहती है, व एक बार सूर्य से दूसरी ओर झुकी रहती है. इसी प्रकार वर्ष में दो बार ऐसी स्थिति भी आती है, जब पृथ्वी का झुकाव न सूर्य की ओर ही होता है, और न ही सूर्य से दूसरी ओर, बल्कि बीच में होता है. इसे इक्विनॉक्स कहा जाता है. इन दोनों तिथियों पर दिन और रात की बराबर लंबाई लगभग बराबर होती है. ऐसा भूमध्य रेखा पर होगा. सन 2017 में यह 20 मार्च और 22 सितम्बर को होगा। यह भी अलग-अलग अक्षांश यानी लैटीट्यूड पर अलग-अलग दिन होता है.
रेनबो डाइट
रेनबो डाइट का शाब्दिक अर्थ है इन्द्रधनुषी डाइट. यानी इन्द्रधनुष को रंगों का भोजन. व्यावहारिक मतलब है तरह-तरह के रंगों के फलों और सब्जियों का भोजन जो स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन होता है. फलों और सब्जियों के तमाम रंग होते हैं और हर रंग का अपना गुण होता है.
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

Sunday, January 8, 2017

डिग्री और डिप्लोमा में अंतर क्या है?

भारत में सामान्यतः एक शैक्षिक कार्यक्रम को सभी परीक्षणों के बाद सफलता के साथ पूरा करने के बाद दिया गया प्रमाणपत्र डिग्री है। स्नातक स्तर या उससे ऊपर की उपाधि विश्वविद्यालय देते हैं। उससे नीचे के कोर्स विभिन्न संस्थाएं देती हैं। विश्वविद्यालयों के अलावा कुछ दूसरे मान्यता प्राप्त संगठन भी शैक्षिक प्रमाणपत्र देते हैं। इन्हें डिप्लोमा कहते हैं। इसका अर्थ भी शैक्षिक कार्यक्रम को पूरा करने के बाद दिया गया प्रमाणपत्र है। इनका स्तर भी स्नातक या स्नातकोत्तर हो सकता है। पर यदि उनका गठन विश्वविद्यालय के रूप में नहीं है तो वे डिप्लोमा देते हैं जैसे कि पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन बिजनेस मैनेजमेंट।

जाड़ों में स्वेटर पहनने से हमें सर्दी क्यों नहीं लगती ?

ऊनी कपड़ों में गर्मी नहीं होती, बल्कि वे हमें सर्दी लगने से रोकते हैं। ऊनी या मोटे कपड़े तापमान के कुचालक होते हैं। यानी बाहर की सर्दी से वे ठंडे नहीं होते। हमारे शरीर की गर्मी हमें गर्म रखती है। यही बात गर्मी पर भी लागू होती है। आपने देखा होगा कि रेगिस्तानी इलाकों के लोग मोटे कपड़े पहनते हैं। इसका कारण यह है कि मोटे कपड़े गर्मी को भीतर आने नहीं देते।

लोहे के जहाज पानी पर कैसे तैर जाते हैं?

पहले तैरने या उतराने का सिद्धांत समझ लें। आर्किमीडीज़ का सिद्धांत है कि कोई वस्तु जब पानी में डाली जाती है तब उसके द्वारा हटाए गए जल का भार उस वस्तु के भार के बराबर होता है। और हटाए गए पानी की ताकत उसे वापस ऊपर की ओर उछालती है। इसलिए लोहे का एक टुकड़ा जब पानी में डाला जाता है तब उसके द्वारा हटाए गए पानी की ऊपर को लगने वाली शक्ति को छोटा आकार मिलता है। यदि इसी लोहे के टुकड़े की प्लेट बना दी जाती तो उसका आकार बड़ा हो जाता और वह पानी के नीचे से आनी वाली ताकत का फायदा उठा सकती थी। यही नाव या जहाज के पानी पर उतराने का सिद्धांत है। पानी के ऊपर चलने के लिए या तो पतवार की ज़रूरत होती है अन्यथा किसी घूमने वाली चरखी की। जहाज के इंजन यह काम करते हैं।

रेड सी का रंग क्या लाल होता है?


लाल सागर का यूनानी नाम एरिथ्रा थलासा, लैटिन नाम मेयर रुब्रुम, और अरबी नाम टिग्रीन्या है। इस इलाके में पानी की सतह पर पैदा होने वाली वनस्पति के कारण हो सकता है इसे लाल नाम दिया गया हो। इस इलाके के पहाड़ों का नाम हरेई ईडाम है। हिब्रू भाषा में ईडाम लाल चेहरे वाले एक व्यक्ति का नाम है। इस इलाके में दिशाओं को रंग के नाम दिए गए हैं। लाल शब्द दक्षिण को और काला उत्तर को दर्शाता है। पुराने ज़माने में इसके पास के रेत को मिस्री लोग दशरेत कहते थे, जिसका अर्थ होता है लाल ज़मीन।

लायन्स क्लब क्या है?

लायंस क्लब की स्थापना 7 जून 1917 को अमेरिका में शिकागो के एक बिजनेसमैन मेल्विन जोन्स के प्रयास से हुई थी। मूलत: यह संस्था दूसरों की मदद के लिए सामुदायिक प्रयासों को बढ़ाने के लिए हुई थी। धीरे-धीरे यह अंतरराष्ट्रीय संस्था बन गई। अब इसकी 191 देशों में 44,500 के आसपास शाखाएं हैं। इसका नाम लायंस रखने के पीछे शेर की शक्ति, साहस और ओज को ध्यान में रखा गया था। यह नाम रखने के पहले बाकायदा मतदान किया गया था।

Thursday, January 5, 2017

रेटिंग एजेंसियाँ क्या करती हैं?

क्रेडिट रेटिंग एजेंसियाँ किसी भी देशसंस्था या व्यक्ति की ऋण लेने या उसे चुकाने की क्षमता का मूल्यांकन करती हैं. देशों की अर्थ-व्यवस्था की मजबूती और स्थिरता उनकी साख बढ़ाती है. देशों की रेटिंग करने वाली एजेंसियों में तीन बड़ी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां—फिचमूडीज़ और स्टैंडर्ड एंड पुअर हैं. इनमें सबसे पुरानी एजेंसी है स्टैण्डर्ड एंड पुअर. इसकी स्थापना 1860 में हेनरी पुअर ने की थी. देशों की आर्थिक स्थिति की मूल्यांकन करने के लिए ये एजेंसियां आंकड़ों और तथ्यों का इस्तेमाल करती हैं, जिनमें सरकार द्वारा दी गई रिपोर्टों और सूचनाओं आदि का इस्तेमाल किया जाता है. एजेंसियां उन बातों की जानकारी भी रखती हैं, जिनका पता सामान्य लोगों को नहीं होता. ये रेटिंग एएएबीबीबीसीएसीसीसीसीडी वगैरह के रूप में होती हैं. सामान्यतः सबसे अच्छी रेटिंग है एएए. अच्छे मूल्यांकन का अर्थ है कम ब्याज पर आसानी से क़र्ज़ या निवेश. ख़राब मूल्यांकन का मतलब है ऊंची दरों पर मुश्किल से क़र्ज़.
क्रिकेट में नेल्सन अंक माने क्या?
नेल्सन, डबल नेल्सन और ट्रिपल नेल्सन क्रिकेट में 111, 222 और 333 के स्कोर को कहते हैं. यह एक लोक प्रयोग हैं और इसे ब्रिटेन की नौसेना के अठारहवीं सदी के मशहूर एडमिरल लॉर्ड होरेशियो नेल्सन के नाम से जोड़ते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस बहादुर फौजी की एक आँख, एक हाथ और एक पैर लड़ाई में जाता रहा. यह तथ्य पूरी तरह सही नहीं है. उनकी एक आँख और एक हाथ वाली बात तक ठीक है, पर उनके दोनों पैर थे. बहरहाल नेल्सन स्कोर के साथ अंधविश्वास है कि इसपर विकेट गिरता है. हालांकि यह भी सच नहीं है. ‘द क्रिकेटर’ नाम की मशहूर मैगज़ीन ने पुराने स्कोर की पड़ताल की तो इन स्कोरों पर विकेट ज्यादा नहीं गिरे हैं. सबसे ज्यादा विकेट 0 के स्कोर पर गिरते हैं. बहरहाल प्रसिद्ध अम्पायर डेविड शेफर्ड ने नेल्सन स्कोर को प्रसिद्ध बनाया. वे इस स्कोर पर या तो एक पैर उठा देते थे या तब तक दोनों पैरों पर खड़े नहीं होते थे, जब तक स्कोर आगे न बढ़ जाए. वे उछलते रहते थे. नेल्सन स्कोर से मुकाबले ऑस्ट्रेलिया में 87 के स्कोर को लेकर अंधविश्वास है. 100 से 13 कम यानी 87 को खतरनाक माना जाता है. संयोग है कि ऑस्ट्रेलिया के काफी खिलाड़ी इस स्कोर पर आउट होते हैं.
सुपर कंप्यूटर क्या होता है
आधुनिक परिभाषा के अनुसार, वे कंप्यूटर, जो 500 मेगा-फ्लॉप की क्षमता से कार्य कर सकते हैं, सुपर कंप्यूटर कहलाते है. सुपर कंप्यूटर गति को फ्लॉप (फ्लोटिंग-पॉइंट ऑपरेशंस पर सेकंड) से नापते है. अब दुनिया में क्वॉड्रिलियन या पेटा-फ्लॉप (यानी एक हजार खरब) की गणना कर सकने में सुपर कंप्यूटर बन रहे हैं. सुपरकंप्यूटरों की शुरूआत साठ के दशक से मानी जा सकती है. अमेरिका के कंट्रोल डेटा कॉरपोरेशन के इंजीनियर सेमूर क्रे ने सबसे पहले सुपर कंप्यूटर बनाया. बाद में क्रे ने अपनी कम्पनी क्रे रिसर्च बना ली. यह कम्पनी सुपर कंप्यूटर बनाने के क्षेत्र में एक दौर तक सबसे आगे थी. आज भी क्रे के अलावा आईबीएम और ह्यूलेट एंड पैकर्ड इस क्षेत्र में शीर्ष कम्पनियाँ हैं. पर हाल में जापान और चीन इस मामले में काफी तेजी से आगे बढ़े हैं.
सबसे तेज सुपर कंप्यूटर कहाँ है?
सुपर कंप्यूटर के मामले में स्थिति बदलती रहती है. नवंबर 2016 में जारी सूची के अनुसार चीन का ‘सनवे ताएहूलाइट’ (Sunway Taihulight) विश्व के सबसे तेज सुपर कंप्यूटरों की श्रेणी में पहले स्थान पर है. यह कंप्यूटर आठवीं बार शीर्ष पर रहा है. उधर जापान सुपर कंप्यूटर की श्रेणी में पहले स्थान पर आने की तैयारी कर रहा है. जापान सरकार ने नए सुपर कंप्यूटर के लिए 19.5 बिलियन जापानी येन (लगभग 173 मिलियन डॉलर) खर्च करने की योजना बनाई है. इस कंप्यूटर की क्षमता 130 पेटा फ्लॉप्स की होगी. चीन के सुपर कंप्यूटर की क्षमता 93 पेटा फ्लॉप्स की है. दुनिया के टॉप 500 सुपर कंप्यूटरों की सूची यहाँ देखें https://www.top500.org/lists/2016/11/
डीएवीपी क्या होता?
भारत सरकार के दृश्य-प्रचार का काम करने वाली यह संस्था है. इसका अंग्रेजी में पूरा नाम है डायरेक्टरेट ऑफ एडवर्टाइज़िंग एंड विज़ुअल पब्लिसिटी. भारत सरकार के सभी मंत्रालयों तथा कुछ स्वायत्त संस्थाओं के विज्ञापन और प्रचार का काम यह संस्था करती है. इसकी पृष्ठभूमि दूसरे विश्व युद्ध के बाद बन गई थी, जब भारत सरकार ने एक प्रेस एडवाइज़र की नियुक्ति की थी. उसके पास ही विज्ञापन की ज़िम्मेदारी आई. जून 1941 में उनके अधीन एडवर्टाइज़िंग कंसल्टेंट का पद बनाया गया. 1 मार्च 1942 से यह सूचना और प्रसारण विभाग की एक शाखा के रूप में काम करने लगा. 1 अक्टूबर 1955 से यह मंत्रालय से सीधे जुड़ गया और इसका यह नाम भी तभी मिला.
जुगनू क्यों चमकते हैं?
जुगनू एक प्रकार का उड़ने वाला कीड़ा है, जिसके पेट में रासायनिक क्रिया से रोशनी पैदा होती है। इसे बायोल्युमिनेसेंस कहते हैं। यह कोल्ड लाइट कही जाती है इसमें इंफ्रा रेड और अल्ट्रा वॉयलेट दोनों फ्रीक्वेंसी नहीं होतीं।
मच्छर भनभनाते क्यों हैं?
मच्छरों के शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उनके पंख होते हैं. इन पंखों को वे तेजी से फड़फड़ाते हैं. इस फड़फड़ाने से जो आवाज होती है, वही इनका भनभनाना है. हमारी साँस के साथ बाहर निकलने वाली कार्बन डाईऑक्साइड इन्हें आकर्षित करती है. जब ये हमारे चेहरे के करीब आते हैं तब हमें इनकी भनभनाहट सुनाई पड़ती है.
हिचकी क्यों आती है?

हिचकी का कारण होता है अचानक डायफ्राम में ऐंठन आना. फेफड़ों में अचानक हवा भरने से कंठच्छद (एपिग्लॉटिस) बंद हो जाता है. इससे हिच या हिक् की आवाज आती है. इसीलिए इसे अंग्रेजी में हिक-अप कहते हैं. हिचकी आने की कई वजहें हैं. जल्दी-जल्दी खाना, बहुत गर्म या तीखा खाना, हँसना, खाँसना भी हिचकी का कारण बनता है. शराब पीने और धूम्रपान से भी आती है. इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस भी हिचकियाँ पैदा करता है. श्वसन पर रिसर्च करने वाले एक ग्रुप का कहना है कि मानव शरीर के विकास का एक लक्षण हिचकी है. 

Tuesday, January 3, 2017

क्या कुत्ते और बिल्ली भी कभी घास खाते हैं?

क्या कुत्ते और बिल्ली भी कभी घास खाते हैं? अगर खाते हैं, तो क्या भोजन के रूप में खाते हैं?

तेजस्विनी गोयल पुत्री: सुनील गोयल, मालाखेड़ा बाजार (हरि किशन न्यूज पेपर एजेंसी), राजगढ़ (अलवर)-301408 


आपने कुत्ते और बिल्ली को कई बार घास खाते देखा होगा। खासतौर से कुत्ते घास खाकर उलटी करते हैं। दरअसल प्रकृति ने उन्हें अपना इलाज करने का यह तरीका सिखाया है। बीमार होने पर वे ऐसा करते हैं। वे प्राकृतिक रूप से घास नहीं खाते, लेकिन बीमार पड़ने पर दोनों खास किस्म की घास खाते हैं। घास खाने के उनका पेट में अफारा होता और बीमारी पैदा कर रही चीज उल्टी या दस्त के साथ बाहर आ जाती है। पालतू कुत्ते ही नहीं जंगली कुत्ते भी इसी तरह अपना इलाज करते हैं। ऐसे अध्ययन सामने आए हैं, जिनसे पता लगता है कि कुत्ते अपनी पाचन शक्ति को बेहतर बनाने के लिए भी ऐसा करते हैं। कुत्ते-बिल्ली ही नहीं और भी कई जीव ऐसे ही अपना प्राकृतिक इलाज करते हैं। उनका यह सहज ज्ञान ध्यान खींचता है।

चिंपाजी जब विषाणुओं के संक्रमण से बीमार होते हैं या फिर उन्हें डायरिया या मलेरिया होता है तो वे एक खास पौधे तक जाते हैं। चिंपाजियों का पीछा कर वैज्ञानिक आसपिलिया नाम के पौधे तक पहुंचे। इसकी खुरदुरी पत्तियां चिंपाजियों का पेट साफ करती हैं। आसपिलिया की मदद से परजीवी जल्द शरीर से बाहर निकल जाते हैं। संक्रमण भी कम होने लगता है। तंजानिया के लोग भी इस पौधे का दवा के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। काला प्लम विटेक्स डोनियाना, बंदर बड़े चाव से खाते हैं। यह सांप के जहर से लड़ता है। यलो फीवर और मासिक धर्म की दवाएं बनाने के लिए भी इनका इस्तेमाल होता है। बीमार होने पर भेड़ ऐसे पौधे चरती है जिनमें टैननिन की मात्रा बहुत ज्यादा हो। ठीक होने के बाद वह फिर से सामान्य घास चरने लगती है। 

जीरो (शून्य) एफआईआर क्या होती है? इसमें और सामान्य एफआईआर में क्या अंतर है?

सत्य स्वरूप दत्त, 21, विजया हैरिटेज, कदमा, जमशेदपुर-831005


प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) पुलिस द्वारा तैयार किया गया एक लिखित अभिलेख है, जिसमें संज्ञेय अपराध की जानकारी होती है। मूलतः यह पीड़ित व्यक्ति की शिकायत है। यह एक महत्वपूर्ण दस्तावेज इसलिए है, क्योंकि इसके आधार पर ही भविष्य की न्यायिक प्रक्रिया चलती है। दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा- 154 के अनुसार संज्ञेय अपराध के किए जाने से संबंधित प्रत्येक इत्तला, यदि पुलिस थाने के भार-साधक अधिकारी को मौखिक दी गई हैं तो उसके द्वारा या उसके निदेशाधीन लेखबद्ध कर ली जाएगी और इत्तला देने वाले को पढ़कर सुनाई जाएगी और प्रत्येक ऐसी इत्तला पर, चाहे वह लिखित रूप में दी गई हो या पूर्वोक्त रूप में लेखबद्ध की गई हो, उस व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे, जो उसे दे और उसका सार ऐसी पुस्तक में, जो उस अधिकारी द्वारा ऐसे रूप में रखी जाएगी जिसे राज्य सरकार इस निमित्त विहित करें, प्रविष्ट किया जाएगा ।

शून्य एफआईआर एक नई अवधारणा है, जो दिसम्बर 2012 में दिल्ली में हुए गैंगरेप के बाद सामने आई है। इसकी सलाह जस्टिस जेएस वर्मा की अध्यक्षता में बनाई गई समिति ने की थी। सामान्यतः एफआईआर उस थाने में दर्ज होती है जिसके क्षेत्राधिकार में अपराध हुआ हो। ज़ीरो एफआईआर किसी भी थाने में दर्ज कराई जा सकती है। इसके बाद पुलिस और न्याय प्रक्रिया से जुड़े विभागों को जिम्मेदारी बनती है कि एफआईआर का सम्बद्ध थाने में स्थानांतरण कराएं। मूलतः यह महिलाओं को सुविधा प्रदान कराने की व्यवस्था है। और इसका उद्देश्य यह भी है कि पुलिस फौरन कार्रवाई करे। अभी देश के तमाम पुलिस अधिकारी भी इस व्यवस्था से खुद को अनभिज्ञ बताते हैं।

रॉकेट वगैरह छोड़ते समय उल्टी गिनती गिनी जाती है, ऐसा क्यों? 

खुशी शर्मा, 2, नाथानी कांप्लेक्स, न्यू शांति नगर, रायपुर (छ.ग.)


आपने मुहावरा सुना होगा कि फलां की उलटी गिनती शुरू हो गई. यानी कि अंत करीब है। इस मुहावरे को बने अभी सौ साल भी नहीं हुए हैं, क्योंकि उलटी गिनती की अवधारणा बहुत पुरानी नहीं है। काउंटडाउन सिर्फ रॉकेट छोड़ने के लिए ही इस्तेमाल नहीं होता। फिल्में शुरू होने के पहले शुरुआती फुटेज पर उल्टी गिनतियाँ होती हैं। नया साल आने पर पुराने साल के आखिरी सप्ताह काउंटडाउन शुरू हो जाता है।

काउंटडाउन सिर्फ रॉकेट छोड़ने के लिए ही इस्तेमाल नहीं होता। बल्कि इसकी शुरुआत कैम्ब्रिज युनिवर्सिटी में नौका प्रतियोगिता में हुई थी। सन 1929 में फ्रिट्ज लैंग की एक जर्मन साइंस फिक्शन मूवी डाई फ्रॉ इम मोंड में चंद्रमा के लिए रॉकेट भेजने के पहले नाटकीयता पैदा करने के लिए काउंटडाउन दिखाया गया। पर अब इस काउंटडाउन का व्यावहारिक इस्तेमाल भी होता है। आमतौर पर एक सेकंड की एक संख्या होती है। उल्टी संख्या बोलने से बाकी बचे सेकंडों का पता लगता है। विमान के कॉकपिट में भी होता है।

उपग्रह प्रक्षेपण के लिए 72 से 96 घंटे पहले उलटी गिनती शुरू की जाती है. इस दौरान उड़ान से पहले की कुछ प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं. रॉकेट के साथ उपग्रह को जोड़ना, ईंधन भरना और सहायक उपकरणों का परीक्षण करना इसका हिस्सा है। इस चेकलिस्ट की मदद से उड़ान कार्यक्रम सुचारु चलता है। अगस्त 2013 में भारत के जीएसएलवी रॉकेट पर लगे क्रायोजेनिक इंजन के परीक्षण के लिए चल रहे काउंटडाउन के दौरान प्रक्षेपण से एक घंटे 14 मिनट पहले एक लीक का पता लगा और काउंटडाउन रोक दिया गया और उड़ान स्थगित कर दी गई। आपने देखा होगा कि एक दिनी और टी-20 क्रिकेट मैच शुरू करने के पहले काउंट डाउन होता है. यह सिर्फ नाटकीयता पैदा करने के लिए है.

कादम्बिनी के अगस्त 2016 के अंक में प्रकाशित

Friday, December 30, 2016

‘एंग्लो इंडियन’ कौन हैं?

एंग्लो इंडियन का मतलब है ऐसे लोग जिनके माता-पिता में से कोई एक भारतीय और यूरोपीय मूल का हो. 15 अगस्त 1947 को भारत से अंग्रेज विदा हो गए, पर लगभग 30,000 लोग ऐसे नहीं गए जो या तो यूरोपीय समुदाय से थे या यूरोपीय और भारतीय मूल के माता-पिताओं की संतान थे. भारत में रह गए अंग्रेजों को एंग्लो इंडियन कहा जाता है. पर एंग्लो इंडियन केवल भारत में ही नहीं रहते दुनिया के कई देशों में रहते हैं. ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में काफी बड़ी संख्या में एंग्लो इंडियन हैं. इस एंग्लो में एंग्लो ज्यादा है इंडियन कम. इनकी मातृभाषा अंग्रेजी है और रीति-रिवाज भी. कहना मुश्किल है कि भारत में अभी एंग्लो-इंडियन समुदाय के कितने लोग हैं क्योंकि 1941 की जनगणना के बाद से भारत में जातीय और सामुदायिक आधार पर जनगणना नहीं की गई है. पर अनुमान है कि इनकी संख्या लगभग सवा लाख है जिनमें से ज्यादातर कोलकाता और चेन्नई में रह रहते हैं.
भारतीय संविधान में अनुच्छेद 366(2) के तहत एंग्लो इंडियन की परिभाषा इस प्रकार की गई है- ''आंग्ल-भारतीय'' से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसका पिता या पितृ-परंपरा में कोई अन्य पुरुष जनक यूरोपीय उद्भव का है या था, किन्तु जो भारत के राज्य क्षेत्र में अधिवासी है और जो ऐसे राज्य क्षेत्र में ऐसे माता-पिता से जन्मा है या जन्मा था जो वहाँ साधारणतया निवासी रहे हैं और केवल अस्थायी प्रयोजनों के लिए वास नहीं कर रहे हैं . संविधान के अनुच्छेद 331 के तहत एंग्लो इंडियन समुदाय को लोकसभा में विशेष प्रतिनिधित्व दिया जाता है. सोलहवीं लोक सभा में एंग्लो-इंडियन समुदाय के प्रतिनिधि शिक्षक प्रो0 रिचर्ड हे और फिल्मी अभिनेता जॉर्ज बेकर हैं. जॉर्ज बेकर असमिया और बंगाली फिल्मी जगत के विख्यात अभिनेता हैं. मसूरी में रहने वाले लेखक रस्किन बांड, फिल्म अभिनेत्री लारा दत्ता, क्रिकेटर स्टुअर्ट बिन्नी, तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन और क्रिकेटर नासिर हुसेन भी एंग्लो इंडियन हैं.
रेव पार्टी माने क्या?
अंग्रेजी शब्द रेव का मतलब है मौज मस्ती. टु रेव इसकी क्रिया है यानी मस्ती मनाना. पश्चिमी देशों में भी यह शब्द बीसवीं सदी में ही लोकप्रिय हुआ. ब्रिटिश स्लैंग में रेव माने वाइल्ड पार्टी. इसमें डिस्क जॉकी, इलेक्ट्रॉनिक म्यूज़िक का प्राधान्य होता है. अमेरिका में अस्सी के दशक में एसिड हाउस म्यूज़िक का चलन था. रेव पार्टी का शाब्दिक अर्थ हुआ 'मौज मस्ती की पार्टी'. इसमें ड्रग्स, तेज़ पश्चिमी संगीत, नाचना, शोर-गुल और सेक्स का कॉकटेल होता है. भारत में ये मुम्बई, दिल्ली से शुरू हुईं. अब छोटे शहरों तक पहुँच गई हैं, लेकिन नशे के घालमेल ने रेव पार्टी का उसूल बदल दिया है. पहले यह खुले में होती थीं अब छिपकर होने लगी हैं.
महामहिम और महामना में अंतर
शब्दकोश के अनुसार महामना (सं.) [वि.] बहुत उच्च और उदार मन वाला; उदारचित्त; बड़े दिलवाला. [सं-पु.] एक सम्मान सूचक संबोधन. और महामहिम (सं.) [वि.] 1. जिसकी महिमा बहुत अधिक हो; बहुत बड़ी महिमा वाला; महामहिमायुक्त 2. अति महत्व शाली. [सं-पु.] एक सम्मान सूचक संबोधन. आधुनिक अर्थ में हम राजद्वारीय सम्मान से जुड़े व्यक्तियों को महामहिम कहने लगे हैं. मसलन राष्ट्रपति और राज्यपालों को. इस शब्द से सामंती गंध आती है और शायद इसीलिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को अपने पदनाम से पहले 'महामहिम ' जोड़ना पसंद नहीं है. महामना शब्द के साथ सरकारी पद नहीं जुड़ा है. इसका सबसे अच्छा इस्तेमाल महामना मदन मोहन मालवीय के लिए होते देखा गया है.
वर्च्युअल करेंसी किसे कहते हैं?
वर्च्युअल करेंसी का मतलब है आभासी. यानी जो वास्तविक होने का आभास दे. कागजी नोट भी आभासी मुद्रा है. चूंकि सरकार ने जिम्मेदारी ली है, इसलिए कागज पर जिस राशि का भुगतान करने का आश्वासन होता है वह वास्तविक धन होता है. क्रेडिट कार्डों, शॉपिग सेंटरों और एयरलाइंस के लॉयल्टी पॉइंट्स का आप इस्तेमाल करते हैं. यह भी एक प्रकार से मुद्रा है. इसमें बिटकॉइंस का नाम और जुड़ गया है. यह भविष्य की आभासी मुद्रा है. बिटकॉइन एक ऑनलाइन करेंसी और भुगतान-प्रणाली है, जो धन का अंतरराष्ट्रीय संचरण संभव बनाती है. दुनिया भर में हजारों व्यापारी इस क्रिप्टो करेंसी को स्वीकार करते हैं. सुरक्षा की गारंटी देने के लिए क्रिप्टोग्राफी या कूटभाषा का प्रयोग करने के कारण ऐसा कहा जाता है. बिटकॉइन को एक नए प्रकार की करेंसी के रूप में देखा जा रहा है.
राष्ट्रीय गणित दिवस
भारत में  राष्ट्रीय गणित दिवस महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की याद में मनाया जाता है. तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने रामानुजन की 125वीं वर्षगांठ के मौके पर 26 दिसंबर 2011 आयोजित एक कार्यक्रम में वर्ष 2012 को राष्ट्रीय गणित वर्ष घोषित किया. साथ ही उनके जन्मदिन 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस भी घोषित किया. उनका जन्म 22 दिसम्बर 1887 को मद्रास से 400 किलोमीटर दूर इरोड नगर में हुआ था.
Rx (आरएक्स) का निशान डॉक्टर क्यों बनाते हैं?
दरअसल यह निशान Rx (आरएक्स) नहीं होता बल्कि R की अंतिम रेखा को आगे बढ़ाते हुए उसपर क्रॉस लगाकर बनता है. माना जाता है कि यह लैटिन शब्द रेसिपी का निशान है. नुस्खा यानी डॉक्टरी हिदायत. इलाज के लिए इस तरह लें. कुछ लोग इसे यूनानी जुपिटर का चिह्न जियस मानते हैं.
दुनिया की सबसे लंबी रेल सुरंग
विश्व की सबसे लंबी रेल सुरंग 1 जून, 2016 को स्विट्ज़रलैंड के ईस्टफील्ड से बोडियो तक शुरू हुई गोटहार्ड रेल सुरंग है. इस लाइन पर पूरी सेवाएं 11 दिसंबर 2016 से शुरू हुईं. स्विट्ज़रलैंड के आल्प्स पहाड़ों के नीचे बनी सुरंग से उत्तरी तथा दक्षिणी यूरोप को रेलवे लाइन से जोड़ा जा सकेगा. इस सुरंग से जर्मनी और इटली के बीच की दूरी कम हो गई है. यह सफर 3.40 घंटे था, जो अब 2.40 घंटे का हो गया है.
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

Thursday, December 22, 2016

तमिलनाडु की पार्टी डीएमके का इतिहास

डीएमके शब्द द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम का अंग्रेजी में संक्षिप्त रूप है. यह पार्टी तमिलनाडु और पांडिचेरी में सक्रिय है. इस द्रविड़ पार्टी की स्थापना सन 1949 में सीएन अन्नादुराई ने की थी. इसके पहले द्रविड़ कषगम नाम का दल था, जिससे टूटकर यह पार्टी बनी. द्रविड़ कषगम भी सन 1944 तक जस्टिस पार्टी के नाम से प्रसिद्ध था, जिसके नेता ईवी रामासामी नाइकर (पेरियार) थे. जस्टिस पार्टी की स्थापना सन 1916 में साउथ इंडियन लिबरल फेडरेशन के रूप में मद्रास प्रेसीडेंसी में हुई थी.
इसके जन्मदाता थे टीएम नायर, पी त्यागराय चेट्टी, पीटी राजन और डॉ सी नटेश मुदलियार आदि नेता थे. मूलतः यह गैर-ब्राह्मण संगठन था, जिसका उद्देश्य सामाजिक बराबरी स्थापित करना था. सन 1920 में मद्रास प्रेसीडेंसी में हुए पहले चुनाव में यह संगठन जीतकर सत्तारूढ़ हुआ. ईवी रामासामी नाइकर सन 1919 में कांग्रेस संगठन में ब्राह्मणों के वर्चस्व को खत्म करने के इरादे से शामिल हुए थे.
पेरियार के नेतृत्व में सन 1926 में वाइकोम सत्याग्रह चला, जो ब्राह्मण-विरोधी आंदोलन था. सन 1935 में वे कांग्रेस को छोड़कर जस्टिस पार्टी में शामिल हो गए. उधर 1937 के चुनाव में चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के नेतृत्व में कांग्रेस मद्रास का चुनाव जीती. राजाजी ने स्कूलों में हिंदी भाषा की अनिवार्यता का फैसला किया, जिसके विरोध में पेरियार ने हिंदी-विरोधी आंदोलन चलाया और लोकप्रियता हासिल की.
सन 1969 में अन्नादुराई के निधन के बाद डीएमके का भी विभाजन हो गया. 17 अक्तूबर 1972 को एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) के नेतृत्व में इससे टूटकर अन्ना द्रमुक नाम से एक नई पार्टी और बन गई.
मेडे कॉल क्या होती है?
रेडियो संचार की भाषा में मेडे कॉल आपातकालीन संदेश है. हवाई या समुद्री यात्रा के दौरान जब भी जीवन संकट में पड़ता है तब यह संदेश जारी किया जाता है. कुछ देशों में पुलिस, दमकल दस्ते और परिवहन संगठन भी इसका इस्तेमाल करते हैं.
इस संदेश में तीन बार मेडे, मेडे, मेडे बोला जाता है. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि शोर या व्यवधान के कारण एक बार में कही गई बात को किसी दूसरे अर्थ में न ले लिया जाए. मेडे प्रक्रिया को सबसे पहले 1923 में लंदन के क्रॉयडॉन एयरपोर्ट के वरिष्ठ रेडियो ऑफिसर फ्रेडरिक स्टैनली मॉकफोर्ड ने इस्तेमाल किया. चूंकि उस वक्त लंदन और पेरिस के हवाई अड्डों के बीच ट्रैफिक का संदर्भ था, इसलिए मेडे शब्द फ्रांसीसी मायडर से निकला, जो वेनेज मायडर (मेरी मदद करो) का संक्षिप्त रूप था.
पीएसएलवी क्या है?
पोलर सैटेलाइट लांच वेहिकल का संक्षिप्त नाम है पीएसएलवी. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का यह रॉकेट अब तक का सबसे सफल प्रक्षेपक है. मूल रूप में इसे भारत के दूर संवेदन (रिमोट सेंसिंग) सैटेलाइट को सौर समकालिक कक्षा (सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट) में प्रक्षेपण के लिए बनाया गया था. पीएसएलवी अपेक्षाकृत हल्के उपग्रहों को इससे ऊपर की जियो-स्टेशनरी कक्षा में भी स्थापित कर सकता है. इस रॉकेट को केरल में तिरुवनंतपुर के पास स्थित विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में नब्बे के दशक में डिजाइन किया गया. इसका पहला प्रक्षेपण 20 सितम्बर 1993 को हुआ. उस प्रक्षेपण में इसके पहले और दूसरे चरण ने ठीक काम किया, पर दूसरे और तीसरे चरण में खराबी के कारण यह प्रयोग पूरी तरह सफल नहीं हो पाया. इस शुरुआती धक्के के बाद 1994 में इसका दूसरा प्रक्षेपण सफल हुआ. इसके बाद 1997 में इसके चौथे प्रक्षेपण में आंशिक खराबी आई. उसके बाद से यह किसी परीक्षण में विफल नहीं हुआ है. इस प्रकार 7 दिसंबर 2016 तक इसकी 39 उड़ानों में से केवल दो में बाधाएं आईं है.
राइट टु रिकॉल क्या है?
राइट टु रिकॉल का मतलब है चुने हुए प्रतिनिधि को वापस बुलाना. प्राचीन काल में एथेंस के नगर लोकतंत्र में यह व्यवस्था थी. अमेरिका की राज्य क्रांति के मूल तत्वों में नागरिक के इस अधिकार का ज़िक्र भी है. पर संविधान में इसकी व्यवस्था नहीं है. फिर भी देश के 18 राज्यों में इसकी व्यवस्था है. सन 2011 में 150 रिकॉल चुनाव हुए, जिनमें 75 पदाधिकारियों को उनके पद से हटाया गया. ये रिकॉल सिटी काउंसिल, मेयर, स्कूल बोर्ड वगैरह में हुए हैं. कनाडा के ब्रिटिश कोलम्बिया प्रांत में इसकी व्यवस्था है. स्विट्ज़रलैंड में संघीय स्तर पर तो नहीं, पर छह कैंटनों में इसकी व्यवस्था है. वेनेजुएला में सन 2004 में राष्ट्रपति ह्यूगो शावेस को हटाने के लिए जनमत संग्रह हुआ था, जिसमें जनता ने उन्हें अपने पद पर बने रहने का आदेश दिया. भारत में भी इस अधिकार की माँग की जा रही है.
बंदूक चलाने पर पीछे की तरफ झटका क्यों लगता है?
न्यूटन का गति का तीसरा नियम है कि प्रत्येक क्रिया की सदैव बराबर एवं विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है. जब बंदूक की गोली आगे बढ़ती है तब वह पीछे की ओर भी धक्का देती है. गोली तभी आगे बढ़ती है जब बंदूक का बोल्ट उसके पीछे से प्रहार करता है. तोप से गोला दगने पर भी यही होता है. आप किसी हथौड़े से किसी चीज पर वार करें तो हथौड़े में भी पीछे की ओर झटका लगता है.
नक्षत्र क्या होते हैं?
नक्षत्र यानी स्टार या सितारे जो ऊर्जा पैदा करते हैं. जैसे हमारा सूर्य. संपूर्ण सूर्य के गोले में 13 लाख पृथ्वी समा सकती हैं. सूर्य की सतह का तापमान 6000 डिग्री सैल्शियस है. उसके केंद्र में तापमान 1.5 करोड़ डिग्री सैल्शियस है.
दुनिया की सबसे बड़ी ऐतिहासिक प्रतिमा
चीन के हेनान प्रांत के लुशान में बनी बुद्ध प्रतिमा, जो 128 मीटर ऊँची है. कुतुब मीनार (72.5) से भी ऊँची.
भारत में सबसे पहली ट्रेन यात्रा
16 अप्रैल 1853 को मुम्बई और ठाणे के बीच पहली ट्रेन चली. ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे के 14 डिब्बों वाली उस गाड़ी के आगे एक छोटा फॉकलैंड नाम का भाप इंजन लगा था. पहली ट्रेन ने 34 किलोमीटर का सफर किया.